30-40 घंटों की पूछताछ के बाद अब रिपब्लिक के AVP घनश्याम सिंह को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार

रिपब्लिक घनश्याम सिंह

--- 30-40 घंटों की पूछताछ के बाद अब रिपब्लिक के AVP घनश्याम सिंह को मुंबई पुलिस ने किया गिरफ्तार लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के बाद अब मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के असिसटेंट वाइस प्रेसिडेंट घनश्याम सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। उनकी गिरफ्तारी मंगलवार (नवंबर 10, 2020) सुबह 7:40 बजे हुई। उन्हें फेक टीआरपी के मामले में गिरफ्तार किया गया है। रिपब्लिक मीडिया का कहना है कि ये गिरफ्तारी आधारहीन है। मुंबई पुलिस उन्हें टारगेट कर रही है।

रिपब्लिक मीडिया के डिस्ट्रीब्यूशन हेड घनश्याम सिंह पूछताछ में लगातार मुंबई पुलिस का सहयोग कर रहे थे। पिछले कुछ हफ्तों में कथित टीआरपी मामले में क्राइम ब्रांच यूनिट द्वारा उनसे 30-40 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई और वह जाँच में पूरा सहयोग दे रहे थे। सहयोग की भावना में वह एक नकली और खोखले मामले में भी लगातार कई मौकों पर मुंबई पुलिस के सामने पेश हुए। उन्होंने अपने ज्ञान और क्षमता के अनुसार पुलिस के सभी सवालों के पूरे जवाब दिए हैं।

घनश्याम को एक फर्जी टीआरपी हेरफेर मामले में भ्रामक धाराओं के तहत बुक किया गया है। यहाँ बता दें कि फेक टीआरपी के मामले में मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह के 8 अक्टूबर के प्रेस कॉन्फ्रेंस के बावजूद, न तो वह और न ही मुंबई पुलिस रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क को टीआरपी घोटाले से जोड़ने के लिए एक भी सबूत पेश कर पाई है। इसलिए, घनश्याम की गिरफ्तारी भी अर्णब की अवैध गिरफ्तारी की तरह ही सबूतों और तथ्यों के बजाय निर्धारित प्रतिशोध की देन है।

गौरतलब है कि टीआरपी हेरफेर मामले में हंसा रिसर्च ग्रुप ने मुंबई पुलिस पर बेहद संगीन आरोप लगाए थे। ग्रुप ने कहा था कि मुंबई पुलिस द्वारा उन्हें रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के खिलाफ गलत बयान देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बार और बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, BARC के बार-ओ-मीटर (ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल) का संचालन करने वाली कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख करते हुए इस मामले की जाँच मुंबई पुलिस के बजाय केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की माँग की।

बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर याचिका में हंसा रिसर्च ने आरोप लगाया कि पुलिस उनके कर्मचारियों को फर्जी बयान जारी करने के लिए दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है। साथ ही रिपब्लिक टीवी द्वारा जारी एक डॉक्यूमेंट को फर्जी करार देने के लिए कह रही है।

वहीं वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के बेटे अखिल सिब्बल ने बॉलीवुड के एक प्रख्यात प्रोडक्शन हाउस का पक्ष रखते हुए स्वीकार किया था कि रिपब्लिक टीवी की दर्शक दीर्घा (audience base) और टीआरपी काफी ज़्यादा है। अखिल सिब्बल ने स्वीकार किया कि दो समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ और ‘टाइम्स नाउ’ अंग्रेज़ी समाचार समूहों की 70 फ़ीसदी व्यूअरशिप का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह दावा ऐसे समय में किया गया जब अखिल सिब्बल के पिता की पार्टी से बनी महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार ने रिपब्लिक टीवी पर टीआरपी से छेड़छाड़ और ज़्यादा व्यूअरशिप दिखाने के लिए गलत आँकड़े साझा करने का आरोप लगाया है। 



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