सरकार के साथ बातचीत फ़ेल होने के बाद किसान अब 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड के लिए जुट गए हैं। लेकिन इस बीच शुक्रवार रात को पकड़े गए एक नक़ाबपोश शख़्स ने किसान आंदोलन में हिंसा फैलाने की साज़िश रचे जाने का दावा किया है।
किसान नेताओं ने इस शख़्स को दबोचने के बाद शुक्रवार रात को ही सिंघु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेन्स की। नक़ाबपोश ने कहा, ‘जैसे ही किसान 26 जनवरी को आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे, पहली लाइन में जो हमारा आदमी होगा वो गोली चलाएगा, हमें चार लोगों की फ़ोटो दी गई है, ये लोग स्टेज पर होंगे, इन लोगों को शूट करने की योजना है।’
नक़ाबपोश ने कहा, ‘जिसने हमें सिखाया है, वो राई थाने में एक पुलिस अफ़सर है। हमारे साथ और भी लोग हैं, जो अभी पकड़े नहीं गए हैं, हमारे 60 लोग रैली में आएंगे, वो सभी पुलिस की वर्दी में होंगे।’ शख़्स का कहना है कि उन लोगों ने पैसे के लिए इस काम में शामिल होना कबूल किया। उसने यह भी कहा कि रैली में रुकावट डालने के लिए उनकी टीम में शामिल हर शख़्स को 10 हज़ार रुपये दिए गए थे।
नक़ाबपोश ने कहा, ‘राई थाने का पुलिस अफ़सर जब भी उनसे मिलने आता था, मुंह में कवर लगाकर आता था। जिन नेताओं को शूट करने की योजना थी, उन लोगों का नाम नहीं पता है लेकिन उनके फ़ोटो दिए जा चुके हैं।’ शख़्स ने दावा किया कि उनकी दो टीम हैं और वह 19 जनवरी से सिंघु बॉर्डर पर ही है।
इस शख़्स के दावे में कितनी सच्चाई है, हरियाणा पुलिस इस बात की जांच कर रही है। उसे पूछताछ के लिए कुंडली पुलिस स्टेशन ले जाया गया है।
किसान आंदोलन पर देखिए वीडियो-
किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि इस शख़्स को तब दबोचा गया जब उसने किसान आंदोलनकारियों को यह कहकर बदनाम करने की कोशिश की कि वे धरना स्थल के नज़दीक एक लड़की का उत्पीड़न कर रहे थे। दल्लेवाल ने कहा कि जब हमने उसे पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि वह सिर्फ़ हंगामा खड़ा करना चाहता था। इसके बाद उसने सारी बातें उगल दीं।
पुलिस ने आरोपों को बकवास बताया
सोनीपत के राई पुलिस स्टेशन के एसएचओ विवेक मलिक ने ‘इंडिया टुडे’ से कहा कि उन्होंने इस शख़्स की सारी बातों को सुना है और जिस पुलिस अफ़सर का नाम उसने लिया है, ऐसा कोई अफ़सर राई पुलिस स्टेशन में नहीं है। उन्होंने कहा कि उसके द्वारा बताई गई यह कथित योजना बेमतलब है और पुलिस की किसान आंदोलन में कोई भूमिका नहीं है।
‘परेड शांतिपूर्ण रहेगी’
दूसरी ओर, किसानों ने कहा है कि वे दिल्ली की बाहरी रिंग रोड पर ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और गणतंत्र दिवस समारोह में किसी भी तरह की रुकावट पैदा नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने कहा है कि उनकी परेड शांतिपूर्ण रहेगी। परेड के रूट को लेकर किसानों की पुलिस के साथ बातचीत जारी है।
किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से जारी की गई प्रेस रिलीज में कहा गया है कि परेड में शामिल ट्रैक्टर्स पर भारत का तिरंगा और किसानों की यूनियनों के झंडे लगे होंगे। किसी भी राजनीतिक दल के झंडे लगाने की अनुमति नहीं होगी। परेड में इस आंदोलन में शहीद हुए लोगों के परिवार के सदस्य, सेना में रह चुके अफ़सर और नामी खिलाड़ी भी शामिल होंगे।
परेड पर पुलिस फ़ैसला ले: कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट दिल्ली पुलिस से कह चुका है कि वह 26 जनवरी को होने वाली किसान ट्रैक्टर परेड को लेकर दायर अपनी याचिका को वापस ले ले। दिल्ली पुलिस ने याचिका में किसान ट्रैक्टर परेड पर रोक लगाने की मांग की थी। पुलिस का कहना था कि परेड होने से गणतंत्र दिवस समारोह के आयोजन में अड़चन आएगी और इससे दुनिया भर में देश की छवि ख़राब होगी।
अदालत ने कहा है कि पुलिस को ही इस बारे में फ़ैसला करना होगा कि परेड की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं। अदालत ने कहा कि पुलिस के पास इस बारे में फ़ैसला लेने का पूरा अधिकार है और वह इस मामले में दख़ल नहीं दे सकती।
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