पार्टी नेताओं की स्थायी अध्यक्ष की मांग को लेकर कांग्रेस में हुए घमासान के बाद इस दिशा में प्रगति होने जा रही है। कांग्रेस में फ़ैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्था कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की आज बैठक होगी। पार्टी नेताओं की ओर से लगातार नए अध्यक्ष की मांग को लेकर दबाव बनाया जा रहा है। सीडब्ल्यूसी की बैठक में इस मसले के अलावा पार्टी के आतंरिक चुनाव, पत्रकार अर्णब गोस्वामी के लीक हुए कथित चैट्स को लेकर, किसान आंदोलन पर भी चर्चा हो सकती है। सोनिया गांधी इस बैठक की अध्यक्षता करेंगी।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति ने कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव का कार्यक्रम पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेज दिया है।
चिट्ठी से आया था भूचाल
कुछ महीने पहले कांग्रेस में उस वक़्त जबरदस्त भूचाल आया था, जब पार्टी के 23 वरिष्ठ नेताओं ने सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर उनके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद हुई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में भी जमकर बवाल हुआ था। हालात उस वक़्त और ज़्यादा बिगड़ गए थे जब चिट्ठी लिखने वाले नेताओं को दूसरे नेताओं ने निशाने पर ले लिया था और कांग्रेस की लड़ाई चौराहे पर आ गई थी।
कांग्रेस के ताज़ा हाल पर देखिए चर्चा-
लेकिन उसके बाद सोनिया गांधी ने दिसंबर महीने में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और असंतुष्ट नेताओं की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में राहुल गांधी ने कहा था, 'जैसा सब चाहते हैं, उसके अनुरूप मैं पार्टी के लिए काम करने को तैयार हूं।' लेकिन बाद में ऐसी भी ख़बरें आईं कि राहुल अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते।
हालांकि कांग्रेस नेताओं को भरोसा है कि राहुल अपनी जिद छोड़कर अध्यक्ष पद संभाल लेंगे। कृषि क़ानूनों के मसले पर राहुल की अगुवाई में कांग्रेस ने सक्रियता दिखाई है। राहुल गांधी इस मसले पर पंजाब में ट्रैक्टर यात्रा निकालने से लेकर लगातार ट्वीट कर सरकार पर दबाव बढ़ा रहे हैं।

ऐसे वक़्त में जब किसानों के आंदोलन के कारण देश में सियासी पारा चरम पर है तो मुख्य विपक्षी दल होने के नाते कांग्रेस को इस मुद्दे को और सक्रियता से उठाना चाहिए। साथ ही स्थायी अध्यक्ष के चयन का मसला और पार्टी में जोर पकड़ रही आंतरिक चुनाव की मांग को भी आलाकमान को गंभीरता से लेना होगा क्योंकि बाग़ियों की यही दो मांगें अहम हैं।
पिछले साल अगस्त में जब कपिल सिब्बल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि लोग अब पार्टी को प्रभावी विकल्प नहीं मानते और नेतृत्व पर सवाल खड़े किए थे तो अधीर रंजन चौधरी से लेकर सलमान खुर्शीद और कई नेता उन पर हमलावर हो गए थे। तब यह सवाल उठा था कि आख़िर कांग्रेस आलाकमान पार्टी नेताओं के मीडिया में दिए जा रहे इन बयानों को लेकर उन पर कार्रवाई क्यों नहीं करता। क्योंकि इससे पार्टी को तगड़ा नुक़सान हो रहा था।
इसके अलावा हाल ही में यूपीए अध्यक्ष पद के लिए एनसीपी मुखिया शरद पवार के नाम की चर्चा होने और शिव सेना का इसको समर्थन देने से भी साफ है कि कांग्रेस को उसके सहयोगी दल भी अहमियत नहीं देते, जिनके साथ वह सरकार में शामिल है। सिर्फ़ चार राज्यों में पार्टी की अपने दम पर सरकार है और उसमें भी राजस्थान में कब फिर से बवाल हो जाए, कोई नहीं जानता। पंजाब में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के ख़िलाफ़ बग़ावत की चिंगारी सुलग रही है।
देखना होगा कि पार्टी असंतुष्ट या बाग़ी नेताओं की स्थायी अध्यक्ष और पार्टी में आतंरिक चुनाव की मांग को लेकर कहां तक पहुंच पाती है।
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