--- The Wire के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन पर FIR: ‘किसान’ की मौत पर फैलाई थी फेक न्यूज, एक्शन में UP पुलिस लेख आप ऑपइंडिया वेबसाइट पे पढ़ सकते हैं ---
किसान आंदोलन के दौरान गणतंत्र दिवस के दिन मंगलवार (जनवरी 26, 2021) को किसानों ने ट्रैक्टर रैली आयोजित की, जिसमें एक प्रदर्शनकारी की मौत को लेकर जम कर प्रोपेगेंडा फैलाया गया। अब उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित सिविल लाइन थाने में ‘The Wire’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ये FIR रविवार (जनवरी 31, 2021) को संजू तुरैहा ने दर्ज कराई है।
असल में सिद्धार्थ वरदराजन ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शनिवार को सुबह 10:08 बजे एक ट्वीट डाला था, जिसमें ‘The Wire’ ने किसान आंदोलन में ट्रैक्टर से स्टंट करते हुए मारे गए प्रदर्शनकारी की मौत के लिए परिजनों के हवाले से दिल्ली पुलिस को जिम्मेदार ठहराया था और साथ ही पोस्टमॉर्टम करने वाले उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों पर सवाल उठाया था। इसमें डॉक्टरों की प्रतिक्रिया भी नहीं ली गई थी।
मृतक नवरीत सिंह के दादा हरदीप सिंह के बयान के आधार पर उस ट्वीट और लेख में दावा किया गया था कि उसकी मृत्यु पुलिस की गोली लगने से हुई है। साथ ही डॉक्टर के ‘हाथ बँधे हुए थे और वो कुछ नहीं कर सकता था’ – ऐसा भी लिखा हुआ था। FIR में कहा गया है कि इस बयान को लेख में कुछ ऐसे प्रस्तुत किया गया, जिससे पाठक इसे डॉक्टर का ही बयान समझ कर दिग्भ्रमित हो जाएँ।
FIR के अनुसार, इस ट्वीट और लेख के कारण रामपुर के लोगों में आक्रोश बढ़ गया है और साथ ही क्षेत्र में तनाव का भी माहौल बना हुआ है। वादी का कहना है कि ये पोस्ट निश्चित रूप से षड्यंत्र के अंतर्गत जनसामान्य की क्षति करने के लिए, अनुचित लाभ कमाने के लिए और हिंसा भड़काने के लिए किया गया प्रतीत होता है। नवरीत सिंह के पोस्टमॉर्टम को लेकर इस FIR में डिटेल्स दर्ज हैं, जिसमें लिखा है:
“मृतक का पोस्टमॉर्टम जिला शासकीय चिकित्सालय, रामपुर के शासकीय चिकित्सा अधिकारी के 3 सदस्यीय पैनल द्वारा किया गया था। रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में एसपी और थाना प्रभारी को सौंपा गया था, जैसा नियमानुसार होता आ रहा है। पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी भी हुई है। डॉक्टर ने किसी को कोई बयान नहीं दिया है। तीनों डॉक्टरों ने उक्त ट्वीट और लेख का खंडन किया है। अभी तक सिद्धार्थ वरदराजन ने उसे डिलीट तक नहीं किया है।”
सिद्धार्थ वरदराजन पर सोशल मीडिया पर बिना तथ्यों की जानकारी के गलत और भड़काऊ पोस्ट डालने, डॉक्टर का गलत बयान दर्शा कर ‘किसान’ की मौत के लिए पुलिस की गोली को जम्मेदार ठहराने, जनता को भड़काने, उपद्रव पैदा करने, शांति-व्यवस्था को बिगाड़ने और डॉक्टरों की छवि धूमिल करने के प्रयासों का आरोप लगाया गया है। IPC की धारा-505 और IT एक्ट, 2008 की 66A के तहत इसे गंभीर अपराध माना गया है।
उक्त प्रदर्शनकारी अपने ट्रैक्टर से पुलिस बैरिकेडिंग को तोड़ने का प्रयास कर रहा था। ऐसे ही स्टंट के दौरान ट्रैक्टर पलट गया। ये पूरी वारदात कैमरे में भी कैद हो गई। लेकिन, राजदीप सरदेसाई की अगुआई में मीडिया का एक वर्ग ये अफवाह फैलाने में जुट गया कि उक्त प्रदर्शनकारी को पुलिस ने गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। जबकि वीडियो के अलावा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी इस दावे की पुष्टि नहीं करते।
उत्तर प्रदेश पुलिस और अस्पताल के डिप्टी सीएमओ के मना करने के बावजूद द वायर ने अपने शीर्षक में बदलाव न करके भ्रामक शीर्षक को आगे बढ़ाया। हालाँकि, जिला मजिस्ट्रेट रामपुर ने उन तीन डॉक्टरों की एक हस्ताक्षरित डेक्लरेशन को साझा किया, जिन्होंने शव परीक्षण किया था और बताया था कि उपरोक्त आरोप झूठे थे। घटनास्थल पर ‘Times Now’ के पत्रकार प्रियांक त्रिपाठी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने घायल ‘किसान’ को अस्पताल नहीं ले जाने दिया।
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