आम आदमी पार्टी भी करेगी किसान महापंचायत, 28 को मेरठ जाएंगे केजरीवाल

किसान आंदोलन के जरिये गर्म हो रही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में अब आम आदमी पार्टी की भी एंट्री होने जा रही है। अभी तक राष्ट्रीय लोकदल और कांग्रेस की ओर से किसान महापंचायतें आयोजित की जा रही थीं तो अब आम आदमी पार्टी भी इस राजनीतिक मौक़े का फायदा उठाते हुए 28 फ़रवरी को मेरठ में किसान महापंचायत करेगी। 

उत्तर प्रदेश में पार्टी के प्रभारी संजय सिंह ने कहा है कि इस किसान महापंचायत में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी पहुंचेंगे। संजय सिंह सोमवार को मेरठ पहुंचे थे, जहां उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर किसान महापंचायत की तैयारियों का जायजा लिया। कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ चल रहे किसानों के आंदोलन में कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी भी खासी सक्रिय है। 

दिल्ली में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद आम आदमी पार्टी अपना विस्तार कर रही है। पार्टी ने एलान किया है कि वह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात सहित कई राज्यों में विधानसभा का चुनाव लड़ेगी।

एग्रेसिव अंदाज में केजरीवाल

कृषि क़ानूनों को लेकर केजरीवाल पिछले साल दिसंबर में तब बहुत आक्रामक नजर आए थे, जब उन्होंने दिल्ली की विधानसभा में कृषि क़ानूनों की कॉपी फाड़ दी थी। जब से दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसानों का आंदोलन शुरू हुआ है, अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी जबरदस्त सक्रिय हैं। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के बॉर्डर्स पर किसानों के लिए तमाम ज़रूरी इंतजाम किए हैं और वह और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इन इंतजामों का निरीक्षण भी करते रहते हैं। 

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संजय सिंह होंगे चेहरा!

राज्यसभा सांसद संजय सिंह योगी सरकार के ख़िलाफ़ लगातार आवाज़ उठा रहे हैं। योगी सरकार ने उनके ख़िलाफ़ कई मुक़दमे भी दर्ज किए हैं। यह तय है कि संजय सिंह ही उत्तर प्रदेश में पार्टी का चेहरा होंगे। माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी राज्य के कुछ छोटे दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव मैदान में उतर सकती है। आम आदमी पार्टी पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के नेतृत्व में बने भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल हो सकती है। 

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जयंत चौधरी ने लगाया जोर

कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हो रही किसान महापंचायतों ने इस इलाक़े में राजनीतिक ज़मीन खो चुकी राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) को भी जिंदा होने का मौक़ा दे दिया है। आरएलडी की ओर से इन दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगातार किसान महापंचायतें की जा रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव की तरह 2022 के विधानसभा चुनाव में भी आरएलडी और समाजवादी पार्टी मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अगर किसान आंदोलन लंबा चलता है और जाट-मुसलिम आरएलडी के पक्ष में एकजुट होते हैं तो यह बीजेपी के लिए ख़तरे की घंटी है। 

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प्रियंका ने संभाला मोर्चा

कांग्रेस भी इन दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान महापंचायतें कर रही है और पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने हफ़्ते भर के अंदर दो महापंचायतों में हिस्सा लिया है। सहारनपुर और बिजनौर में हुई इन महापंचायतों में कांग्रेस नेताओं ने ठीक-ठाक भीड़ जुटाई है और उसे इसका फायदा मिल सकता है। 

प्रियंका ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ‘जय जवान जय किसान’ अभियान की शुरुआत की है। 27 जिलों में चलने वाले इस अभियान की शुरुआत उन्होंने 10 फरवरी को सहारनपुर से की थी। सोमवार को वह बिजनौर पहुंचीं थीं और किसान महापंचायत में मोदी सरकार पर हमले किए थे। 

योगी के लिए मुश्किल

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी ज़मीन बीजेपी के लिए बेहद उपजाऊ है। 2013 के सांप्रदायिक दंगों के बाद हिंदू मतों के जबरदस्त ध्रुवीकरण से बीजेपी को 2014, 2017 और 2019 के चुनाव में फायदा हुआ था। यह 2022 में भी मिल सकता था लेकिन किसान आंदोलन की वजह से बीजेपी का ‘हिंदू समीकरण’ बिगड़ता दिख रहा है क्योंकि इन किसान महापंचायतों में जाट और मुसलिम फिर से करीब आ रहे हैं, जो यहां क्रमश: 17 और 26 फ़ीसदी हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को 2022 के विधानसभा चुनाव में नुक़सान हो सकता है।



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