सबूत भारी पड़े सिसोदिया पर, जवाब नहीं दे पाए

दिल्ली शराब घोटाले में रविवार को 8 घंटे की पूछताछ के बाद मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी बताती है कि सीबीआई ने अहम सबूत मिलने के बाद ही दिल्ली के डिप्टी सीएम को गिरफ्तार किया। हालांकि सीबीआई सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने सिसोदिया को सबूतों को नष्ट करने में शामिल होने के कारण गिरफ्तार किया है। आम आदमी पार्टी ने आज सोमवार को इस गिरफ्तारी के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है, लेकिन इन प्रदर्शनों से क्या हासिल होगा, सवालों का सामना तो आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल को भी करना पड़ेगा। इस घोटाले की आंच में अभी कई लोगों का झुलसना बाकी है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिसोदिया की गिरफ्तारी 2021-22 की नई दिल्ली शराब नीति में करप्शन के संबंध में है। सिसोदिया को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 477 ए (धोखाधड़ी करने का इरादा) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत गिरफ्तार किया गया है।

सीबीआई ने कहा कि मनीष सिसोदिया के जवाब संतोषजनक नहीं थे और वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। आठ घंटे की पूछताछ के दौरान, सिसोदिया का सामना सीबीआई ने सबूतों के साथ कराया। इसमें दस्तावेजी और डिजिटल सबूत शामिल थे।

सीबीआई सूत्रों का दावा है कि सीबीआई के सबूतों के सामने सिसोदिया अपना बचाव करने में नाकाम रहे। सूत्रों ने बताया कि दिल्ली शराब नीति में कुछ विवादास्पद प्रावधान जोड़े गए थे जो पहले मसौदे का हिस्सा नहीं थे। सीबीआई ने जब इसके बारे में पूछा तो मनीष सिसोदिया यह बताने में नाकाम रहे कि उन प्रावधानों को अंतिम मसौदे में कैसे शामिल किया गया।


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ड्राफ्ट में किए गए बदलावों पर, सिसोदिया ने ज्यादातर जवाब दिया कि "मुझे नहीं पता।"

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि आबकारी विभाग में काम करने वाले एक अधिकारी के एक बयान से ड्राफ्ट में हेरफेर करने में सिसोदिया की भूमिका का खुलासा हुआ। जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से पता चलता है कि ये प्रावधान व्हाट्सएप पर एक अधिकारी द्वारा प्राप्त किए गए थे।



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