पंजाब: बीजेपी में वापसी के लिए तैयार हैं नवजोत सिद्धू!

अपनी शेरो-शायरियों और अलग ही अंदाज में भाषण देने की कला से चर्चा बटोरने वाले नवजोत सिंह सिद्धू एक बार फिर अपनी पुरानी पार्टी बीजेपी में लौटने के लिए तैयार हैं। पिछले डेढ़ साल से मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से नाराज चल रहे नवजोत सिंह सिद्धू को मनाने की लाख कोशिशें कांग्रेस आलाकमान की ओर से की गईं। 

लेकिन अब जिस तरह का भाषण उन्होंने राहुल गांधी के पंजाब दौरे के दौरान मंच पर राहुल की मौजूदगी में दिया है, उससे उनकी वापसी के रास्ते भी बंद हो गए दिखते हैं और साथ ही बीजेपी में फिर वापसी के रास्ते भी खुल रहे हैं।  

जब सिद्धू बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में आए तो वहां की तरह यहां भी उन्होंने जोरदार भाषण दिए। बीजेपी में रहते हुए जहां वह राहुल गांधी को पप्पू बताते थे, वहीं कांग्रेस में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फेंकू बताने लगे।

लंबे समय से शांत बैठे सिद्धू के बारे में चर्चा है कि वह कांग्रेस में अब सिर्फ नाममात्र के लिए और तब तक हैं जब उन्हें कहीं दूसरी सियासी ठौर नहीं मिल जाती। बीच में जोरदार चर्चा चली कि वह आम आदमी पार्टी में जा सकते हैं या अपना कोई राजनीतिक दल लांच कर सकते हैं और या फिर से बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। 

इन चर्चाओं को तब हवा मिली थी जब इसी साल अगस्त महीने में सिद्धू की पत्नी और अमृतसर से विधायक नवजोत कौर सिद्धू ने कहा था कि बीजेपी अगर शिरोमणि अकाली दल से नाता तोड़ दे तो पार्टी में वापसी पर पुनर्विचार किया जा सकता है। 

सीएम बनना चाहते हैं सिद्धू

सिद्धू सियासी रूप से महत्वाकांक्षी शख़्स हैं। उनकी इच्छा पंजाब का मुख्यमंत्री बनने की है। उनके पक्ष में पॉजिटिव बात यह है कि उनका हिंदू और सिख, दोनों समुदायों के मतदाताओं में आधार है। वह बहुत अच्छी हिंदी बोलते हैं, मशहूर क्रिकेटर रहे हैं और इस वजह से भारत में ख़ूब जाने जाते हैं। 

सिद्धू ने जब बीजेपी छोड़ी थी तो उसके पीछे भी कारण उनकी सियासी महत्वाकांक्षा ही थी। वरना, वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव थे, राज्यसभा के सांसद थे। यह उन्होंने ख़ुद ही कहा था कि बीजेपी आलाकमान ने उनसे पंजाब की सियासत में दख़ल न देने या एक तरह से पंजाब को छोड़ देने के लिए कहा था। तब सिद्धू ने कहा था कि वे पंजाब नहीं छोड़ सकते। 

कांग्रेस में आने के बाद सिद्धू को लगा कि यहां उनकी सियासी महत्वाकांक्षा को पर लग जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में वह जब तक रहे, खटपट की ख़बरें आती रहीं और पिछले साल लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफ़ा दे दिया।

बहरहाल, उनकी पत्नी के हालिया बयान के बाद जब बीते दिनों कृषि क़ानूनों के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल ने बीजेपी और फिर एनडीए का भी साथ छोड़ा तो यह तय माना गया कि सिद्धू जल्द ही पुरानी पार्टी में वापसी करेंगे। 

रावत ने की मनाने की कोशिश 

लेकिन हाल ही में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी बनाए गए हरीश रावत ने चार्ज संभालते ही सिद्धू से मुलाक़ात की और उनके साथ भोजन भी किया। रावत सिद्धू को मनाने में ही जुटे थे कि राहुल गांधी कृषि क़ानूनों के मसले पर एक रैली में भाग लेने पंजाब पहुंच गए। रावत के मनाने पर इस रैली में पहुंचे सिद्धू ने एक बार फिर अमरिंदर सिंह को निशाने पर ले लिया। 

इस विषय पर देखिए, वीडियो-  

सिद्धू ने कहा, ‘अगर हिमाचल सरकार अपने सेब पर एमएसपी दे सकती है तो पंजाब सरकार भी अपनी फसलों पर दे सकती है। सरकारें दिखाने के लिए नहीं होतीं, हल देने के लिए होती हैं। पंजाब सरकार जिम्मेदारी ले और हल दे।’

राहुल गांधी नाराज!

राहुल गांधी की मौजदूगी में सिद्धू के अपनी ही सरकार को निशाने पर लेने के कारण बताया गया है कि राहुल के साथ ही हरीश रावत भी नाराज हुए। इसके बाद सोमवार को हुई रैली में सिद्धू को नहीं बुलाया गया। उधर, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहन लाल ने दावा किया कि सिद्धू की वापसी का रास्ता साफ हो गया है और सिद्धू 2022 का विधानसभा चुनाव बीजेपी की ओर से ही लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि सिद्धू के लिए बीजेपी के दरवाजे हर वक्त खुले हैं। 

सबसे बड़ी बात यह है कि सिद्धू की दिली चाहत पूरी हो चुकी है कि बीजेपी शिरोमणि अकाली दल से अलग हो जाए। सिद्धू जानते हैं कि अमरिंदर के रहते वो कांग्रेस में आगे नहीं जा सकते, शायद इसलिए ही उन्होंने भी खुलकर बग़ावत करते हुए बीजेपी में वापसी का मन बना लिया है।

हिंदू और सिख मतदाताओं में लोकप्रिय होने के कारण बीजेपी सिद्धू को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बना सकती है। 

बाजवा, दूलों भी सिद्धू के ख़िलाफ़

पंजाब में फ़रवरी, 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं और सवा साल का वक्त बचा है। अमरिंदर के ख़िलाफ़ केवल सिद्धू ही नहीं हैं बल्कि पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा और शमशेर सिंह दूलों ने भी कैप्टन के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला हुआ है। इसके अलावा सिद्धू के समर्थक मंत्रियों व विधायकों ने भी अमरिंदर सिंह की मुसीबतें बढ़ाई हुई हैं। सिद्दू, बाजवा और दूलों की एक ही मांग है कि अमरिंदर को हटाया जाए, लेकिन आलाकमान ऐसा कोई रिस्क नहीं लेना चाहता। ऐसे में सिद्धू जल्द ही कांग्रेस से अपनी राह अलग कर लें तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए। 



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